UKPSC UKSSSC Daily MCQ – (Uttarakhand) – 19 January 2026

UKPSC / UKSSSC Daily MCQ – (Uttarakhand) – 19 January 2026

January 19, 2026

उत्तराखंड लोकसेवा आयोग व अधीनस्थ सेवा चयन आयोग द्वारा आयोजित की जानेवाली आगामी परीक्षाओं (UKPSC/ UKSSSC) को मध्यनजर रखते हुए Exam Pillar आपके लिए Daily MCQs प्रोग्राम लेकर आया है। इस प्रोग्राम के माध्यम से अभ्यर्थियों को उत्तराखंड लोकसेवा आयोग व अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के परीक्षाओं के प्रारूप के अनुरूप वस्तुनिष्ठ अध्ययन सामग्री उपलब्ध कराये जायेंगे। 

Daily UKPSC / UKSSSC MCQs : उत्तराखंड (Uttarakhand)
19 January, 2026 

Read This UKPSC / UKSSSC Daily MCQ – (Uttarakhand) in English Language

 

Q1. वैद्यनाथ-कार्तिकेयपुर राजधानी की स्थापना और इसकी ऐतिहासिक स्थिति के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
I. यह राजधानी सुभिक्षराज देव के किसी वंशज द्वारा कुमाऊँ की गोमती घाटी में स्थापित की गई
II. बैजनाथ लेखों में इसका नाम वैद्यनाथ-कार्तिकेयपुर मिलता है
III. इसे कार्तिकेयपुर वंश का चतुर्थ परिवार या पाल वंश के नाम से जाना जाता है
IV. यह राजधानी प्रथम परिवार के बसन्तदेव द्वारा स्थापित की गई थी
उपर्युक्त में से कौन से कथन सही हैं?
(A) केवल I और II
(B) केवल I, II और III
(C) केवल II, III और IV
(D) I, II, III और IV सभी

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Answer: B
Explanation: कथन I सही है क्योंकि वैद्यनाथ-कार्तिकेयपुर राजधानी की स्थापना सुभिक्षराज देव के किसी वंशज ने कुमाऊँ की गोमती घाटी में की थी। सुभिक्षराज देव तृतीय परिवार के अंतिम और कार्तिकेयपुर वंश के 14वें शासक थे, और उनके उत्तराधिकारियों ने नए क्षेत्र में राजधानी स्थानांतरित की। कथन II सही है क्योंकि बैजनाथ लेखों में इस राजधानी का नाम वैद्यनाथ-कार्तिकेयपुर अंकित मिलता है, जो इस स्थान की ऐतिहासिक पहचान और धार्मिक महत्व को दर्शाता है। कथन III सही है क्योंकि इस नए शासक परिवार को कार्तिकेयपुर वंश का चतुर्थ परिवार या पाल वंश के नाम से पहचाना जाता है। यह नामकरण शासकों के नामों में ‘पाल’ प्रत्यय के प्रयोग से स्पष्ट होता है। कथन IV पूर्णतः गलत है क्योंकि यह राजधानी बसन्तदेव ने नहीं बल्कि सुभिक्षराज देव के वंशजों ने स्थापित की थी। बसन्तदेव तो प्रथम परिवार के संस्थापक थे और उनका शासनकाल बहुत पहले का था। इस प्रकार केवल पहले तीन कथन सत्य हैं।

Q2. पाल वंश या चतुर्थ परिवार के शासकों के नामक्रम के संदर्भ में बैजनाथ लेखों में प्राप्त जानकारी के अनुसार सही क्रम क्या है?
(A) त्रिभुवनपाल देव – लखनपाल देव – इन्द्रपाल देव
(B) लखनपाल देव – इन्द्रपाल देव – त्रिभुवनपाल देव
(C) इन्द्रपाल देव – लखनपाल देव – त्रिभुवनपाल देव
(D) लखनपाल देव – त्रिभुवनपाल देव – इन्द्रपाल देव

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Answer: B
Explanation: बैजनाथ लेखों में वैद्यनाथ-कार्तिकेयपुर के शासकों के नाम क्रमशः लखनपाल देव, इन्द्रपाल देव और त्रिभुवनपाल देव मिलते हैं। यह क्रम इस चतुर्थ परिवार या पाल वंश के उत्तराधिकार को स्पष्ट रूप से दर्शाता है। लखनपाल देव इस वंश के प्रथम ज्ञात शासक थे जिन्होंने सुभिक्षराज देव के वंशज के रूप में गोमती घाटी में शासन स्थापित किया। उनके बाद इन्द्रपाल देव ने शासन संभाला, और अंत में त्रिभुवनपाल देव शासक बने। यह नामक्रम पितृ-पुत्र या वंशानुगत उत्तराधिकार की परंपरा का अनुसरण करता प्रतीत होता है। सभी तीन शासकों के नाम में ‘पाल’ प्रत्यय का प्रयोग इस परिवार की विशिष्ट पहचान बन गया, जिससे इन्हें पाल वंश कहा जाता है। विकल्प A गलत है क्योंकि यह उल्टा क्रम प्रस्तुत करता है। विकल्प C गलत है क्योंकि इन्द्रपाल देव प्रथम शासक नहीं थे। विकल्प D भी गलत क्रम दर्शाता है क्योंकि त्रिभुवनपाल देव अंतिम शासक थे, मध्य के नहीं।

Q3. कार्तिकेयपुर वंश के चतुर्थ परिवार की विशिष्टता और भौगोलिक स्थिति के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सर्वाधिक समुचित है?
(A) यह परिवार बंगाल क्षेत्र में शासन करता था और शैव परंपरा का अनुसरण करता था
(B) यह परिवार कुमाऊँ की गोमती घाटी में वैद्यनाथ-कार्तिकेयपुर राजधानी से शासन करता था और इसके शासकों के नाम में ‘पाल’ प्रत्यय के कारण इसे पाल वंश कहा जाता है
(C) यह परिवार गढ़वाल क्षेत्र में केंद्रित था और बौद्ध धर्म का प्रचार करता था
(D) यह परिवार केवल धार्मिक गतिविधियों तक सीमित था और इसका कोई राजनीतिक महत्व नहीं था

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Answer: B
Explanation: कार्तिकेयपुर वंश का चतुर्थ परिवार या पाल वंश कुमाऊँ की गोमती घाटी में स्थित वैद्यनाथ-कार्तिकेयपुर से शासन करता था। यह राजधानी सुभिक्षराज देव के किसी वंशज द्वारा स्थापित की गई थी, जो तृतीय परिवार के अंतिम शासक थे। बैजनाथ लेखों में इस राजधानी और शासकों की विस्तृत जानकारी मिलती है। इस परिवार के तीन प्रमुख शासकों – लखनपाल देव, इन्द्रपाल देव और त्रिभुवनपाल देव – के नामों में ‘पाल’ प्रत्यय का निरंतर प्रयोग इस वंश की विशिष्ट पहचान बन गया। यह प्रत्यय संभवतः रक्षक या पालनहार का अर्थ रखता है, जो शासकीय जिम्मेदारी का प्रतीक है। गोमती घाटी की भौगोलिक स्थिति कुमाऊँ क्षेत्र में रणनीतिक और आर्थिक दृष्टि से महत्वपूर्ण थी। विकल्प A गलत है क्योंकि यह परिवार बंगाल में नहीं बल्कि कुमाऊँ में शासन करता था। विकल्प C गलत है क्योंकि यह गढ़वाल नहीं बल्कि कुमाऊँ की गोमती घाटी में था और बौद्ध प्रचार का कोई विशेष उल्लेख नहीं है। विकल्प D पूर्णतः गलत है क्योंकि यह एक शासक परिवार था जिसका स्पष्ट राजनीतिक और प्रशासनिक महत्व था। बैजनाथ लेखों में इनके शासन का विस्तृत विवरण इनके राजनीतिक महत्व को प्रमाणित करता है।

Q4. कार्तिकेयपुर राजवंश की मूल उत्पत्ति के संदर्भ में विभिन्न विद्वानों के मत निम्नलिखित में से किस प्रकार भिन्न हैं?
(A) लक्ष्मीदत्त जोशी उन्हें अयोध्या के मानते हैं जबकि बद्रीदत्त पाण्डे सूर्यवंशी मानते हैं
(B) दोनों विद्वान उन्हें एक ही मूल से मानते हैं
(C) लक्ष्मीदत्त जोशी उन्हें सूर्यवंशी मानते हैं जबकि बद्रीदत्त पाण्डे अयोध्या से संबंधित मानते हैं
(D) दोनों विद्वान उन्हें विदेशी मूल का मानते हैं

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Answer: A
Explanation: लक्ष्मीदत्त जोशी कार्तिकेयपुर राजाओं को मूलतः अयोध्या के मानते हैं, जिसका संबंध इक्ष्वाकु या रघुवंश से हो सकता है, जबकि बद्रीदत्त पाण्डे उन्हें सूर्यवंशी मानते हैं। ये दोनों विचारधाराएँ राजवंश की वंशागत पहचान को लेकर भिन्न दृष्टिकोण प्रस्तुत करती हैं। अयोध्या से संबंध का तात्पर्य राजवंश का राजस्थान या उत्तर भारत के क्षेत्रों से आना हो सकता है, जबकि सूर्यवंश की मान्यता उन्हें दिव्य अथवा अर्ध-दिव्य उत्पत्ति प्रदान करती है। विकल्प B गलत है क्योंकि दोनों विद्वानों के विचार भिन्न हैं। विकल्प C उल्टा है क्योंकि यह लक्ष्मीदत्त जोशी और बद्रीदत्त पाण्डे के मतों को विपरीत बताता है। विकल्प D गलत है क्योंकि दोनों विद्वान उन्हें भारतीय मूल का मानते हैं, विदेशी नहीं।

Q5. कार्तिकेयपुर राज्य में प्रयुक्त भाषाओं के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सही है?
(A) केवल संस्कृत भाषा का प्रयोग होता था
(B) केवल पालि भाषा का प्रयोग होता था
(C) राजभाषा संस्कृत थी और लोकभाषा पालि थी
(D) राजभाषा पालि थी और लोकभाषा संस्कृत थी

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Answer: C
Explanation: कार्तिकेयपुर राज्य में राजभाषा संस्कृत थी, जिसका प्रयोग शासकीय कार्यों, अभिलेखों, ताम्रपत्रों और औपचारिक संचार के लिए होता था। संस्कृत की यह भूमिका राजभाषा के रूप में उसकी प्रतिष्ठा और वैदिक-धार्मिक परंपरा से जुड़ी थी। साथ ही, जनसामान्य के बीच पालि भाषा का प्रयोग होता था, जिसे लोकभाषा के रूप में मान्यता थी। यह द्विभाषिक प्रणाली सामाजिक संरचना और शैक्षणिक स्तरों को प्रतिबिंबित करती है। विकल्प A और B एकाकी भाषा का उल्लेख करते हैं, जो अधूरा है। विकल्प D गलत है क्योंकि वह भाषाओं को उल्टा क्रम में रखता है।

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