उत्तराखंड लोकसेवा आयोग व अधीनस्थ सेवा चयन आयोग द्वारा आयोजित की जानेवाली आगामी परीक्षाओं (UKPSC/ UKSSSC) को मध्यनजर रखते हुए Exam Pillar आपके लिए Daily MCQs प्रोग्राम लेकर आया है। इस प्रोग्राम के माध्यम से अभ्यर्थियों को उत्तराखंड लोकसेवा आयोग व अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के परीक्षाओं के प्रारूप के अनुरूप वस्तुनिष्ठ अध्ययन सामग्री उपलब्ध कराये जायेंगे।
Daily UKPSC / UKSSSC MCQs : उत्तराखंड (Uttarakhand)
17 January, 2026
| Read This UKPSC / UKSSSC Daily MCQ – (Uttarakhand) in English Language |
Q1. सुभिक्षराज देव के धार्मिक विश्वास और प्रशासनिक योगदान के संदर्भ में कौन सा कथन सही है?
(A) वह परम वैष्णव/परम ब्राह्मण के रूप में प्रतिष्ठित था
(B) उसने सुभिक्षपुर में राजधानी स्थापित की
(C) वह भगवान विष्णु का परम भक्त था
(D) उपरोक्त सभी
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Explanation: सुभिक्षराज देव का शासनकाल तृतीय परिवार एवं कार्तिकेयपुर के अंतिम चरण का प्रतिनिधित्व करता है। उसे ‘परम वैष्णव/परम ब्राह्मण’ कहा गया और वह भगवान विष्णु का परम भक्त था। साथ ही उसने अपनी राजधानी कार्तिकेयपुर के उपखंड सुभिक्षपुर में स्थापित की, जिससे प्रशासनिक विशिष्टता का भी पता चलता है। सहभागी उपाधियों और कार्यों के कारण उपरोक्त सभी कथन उपयुक्त हैं।
Q2. कार्तिकेयपुर के 14वें और अंतिम कत्यूरी शासक की पहचान किस रूप में है?
(A) जतबालदेव
(B) सुभिक्षराज देव
(C) देसतदेव
(D) पद्मदेव
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Explanation: कार्तिकेयपुर वंश का अंतिम शासक सुभिक्षराज देव था, जो तृतीय परिवार के अंतिम और कत्यूरी राजवंश के 14वें शासक के रूप में चिन्हित हैं। उनकी शासन-समाप्ति के साथ ही कत्यूरी साम्राज्य के पतन का आरंभ हुआ। बाकी विकल्पों में जतबालदेव कुलसारी मूर्तिलेख का शासक था, देसतदेव और पद्मदेव क्रमशः पहले शासक थे।
Q3. कुलसारी मूर्तिलेख किस शासक से संबंधित था?
(A) इच्छरदेव
(B) जतबालदेव
(C) पद्मदेव
(D) सुभिक्षराज देव
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Explanation: कुलसारी मूर्तिलेख जतबालदेव से संबंधित है। यह अभिलेख वंश के मूर्तिशिल्प, धार्मिक व्याकरण और ऐतिहासिक भावना का सूचक है। अन्य विकल्पों में अंकित शासकों से कुलसारी मूर्तिलेख का कोई प्रत्यक्ष संबंध नहीं पाया जाता।
Q4. इच्छरदेव के बाद तृतीय परिवार के वंशक्रम का उचित क्रम निम्न में से कौन सा है?
(A) इच्छरदेव – देसतदेव – पद्मदेव – सुभिक्षराज देव
(B) इच्छरदेव – पद्मदेव – देसतदेव – सुभिक्षराज देव
(C) देसतदेव – इच्छरदेव – पद्मदेव – सुभिक्षराज देव
(D) पद्मदेव – इच्छरदेव – देसतदेव – सुभिक्षराज देव
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Explanation: तृतीय परिवार का सही उत्तराधिकार क्रम है: इच्छरदेव, देसतदेव, पद्मदेव, सुभिक्षराज देव। इच्छरदेव द्वारा वंश की स्थापना के पश्चात देसतदेव, फिर दानशीलता के लिए प्रसिद्ध पद्मदेव, और अंत में सुभिक्षराज देव शासन में आए। यह वंशक्रम ऐतिहासिक स्रोतों एवं अभिलेखों द्वारा प्रमाणित है।
Q5. पद्मदेव की दानशीलता का धार्मिक महत्व किन प्रमुख कार्यों से व्यक्त होता है?
(A) उसने तांत्रिक अनुष्ठान करवाए
(B) उसने बद्रीनाथ मंदिर को भूमि दान दी और विविध दान करते हुए प्रसिद्धि प्राप्त की
(C) उसने मूर्तिपूजा का विरोध किया
(D) उसने केवल युद्ध और विजय के लिए प्रसिद्धि पाई
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Explanation: पद्मदेव ने बद्रीनाथ मंदिर को भूमि दान की थी और अपनी दानशीलता के लिए बलि, वैकर्तन, दधीचि, विक्रमादित्य आदि से तुलना पाई। धार्मिक एवं सामाजिक कार्यों में उसकी अपूर्व उदारता एवं लोककल्याणकारी नीति उसे इतिहास में उल्लेखनीय बनाती है। विकल्प A और C उसकी वास्तविक नीति या प्रसिद्धि से संबंधित नहीं हैं, और विकल्प D भी उसकी मूल पहचान का सही चित्रण नहीं करता।
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