उत्तराखंड लोकसेवा आयोग व अधीनस्थ सेवा चयन आयोग द्वारा आयोजित की जानेवाली आगामी परीक्षाओं (UKPSC/ UKSSSC) को मध्यनजर रखते हुए Exam Pillar आपके लिए Daily MCQs प्रोग्राम लेकर आया है। इस प्रोग्राम के माध्यम से अभ्यर्थियों को उत्तराखंड लोकसेवा आयोग व अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के परीक्षाओं के प्रारूप के अनुरूप वस्तुनिष्ठ अध्ययन सामग्री उपलब्ध कराये जायेंगे।
Daily UKPSC / UKSSSC MCQs : उत्तराखंड (Uttarakhand)
16 January, 2026
| Read This UKPSC / UKSSSC Daily MCQ – (Uttarakhand) in English Language |
Q1. तृतीय परिवार की स्थापना एवं वंशक्रम संबंधी सत्य कथन कौन सा है?
(A) सलोड़ादित्य वंश की स्थापना स्वयं सलोड़ादित्य ने की
(B) सलोड़ादित्य वंश की स्थापना इच्छरदेव ने की, जो सलोड़ादित्य का पुत्र था
(C) इच्छरदेव सलोड़ादित्य वंश का अंतिम शासक था
(D) इच्छरदेव और देसतदेव एक ही शासक थे
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Explanation: सलोड़ादित्य वंश की स्थापना सलोड़ादित्य के पुत्र इच्छरदेव ने की, जिसका प्रमाण बालेश्वर और पांडुकेश्वर ताम्रपत्रों से मिलता है। इच्छरदेव के बाद देसतदेव और पद्मदेव शासक बने। विकल्प A गलत है क्योंकि संस्थापक इच्छरदेव थे, न कि सलोड़ादित्य। विकल्प C पूर्णतः गलत है क्योंकि इच्छरदेव बाद में देसतदेव, पद्मदेव और अन्य शासकों द्वारा उत्तराधिकारित हुआ। विकल्प D भ्रामक है क्योंकि इच्छरदेव और देसतदेव विभिन्न शासक थे।
Q2. इच्छरदेव के उत्तराधिकार एवं पारिवारिक संबंधों के संदर्भ में कौन सा युग्म सही है?
(A) इच्छरदेव की पत्नी का नाम सिन्धु देवी था
(B) इच्छरदेव की पत्नी का नाम नाथू देवी था
(C) इच्छरदेव की पत्नी का नाम वेगादेवी था
(D) इच्छरदेव की पत्नी का नाम सामदेवी था
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Explanation: इच्छरदेव की पत्नी का नाम सिन्धु देवी था, जो तृतीय परिवार के वंश-वृक्ष एवं दांपत्य संबंध का महत्वपूर्ण प्रमाण है। बाकी विकल्पों में दिए गए नाम इस वंश या अन्य कत्यूरी शासकों की रानियों से संबंधित हैं, परंतु इच्छरदेव की सही पत्नी सिन्धु देवी ही थी।
Q3. देसतदेव की प्रमुख विशेषता किस रूप में स्थापित है?
(A) सूर्य के समान प्रकाशवान शासक
(B) दीन-दुखियों का रक्षक, मसीहा और स्वर्णदाता
(C) केवल वास्तुकला का प्रवर्तक
(D) परम वैष्णव धर्म का प्रचारक
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Explanation: देसतदेव दीन-दुखियों के रक्षक, मसीहा और स्वर्णदाता के रूप में प्रसिद्ध है। उसके उदार और परोपकारी शासक होने के स्पष्ट उल्लेख मिलते हैं। विकल्प A व C गलत है क्योंकि ये विशेषताएँ देसतदेव से संबंधित नहीं हैं। विकल्प D भी अपूर्ण है क्योंकि उनका मुख्य योगदान दानशीलता और सामाजिक कल्याण रहा।
Q4. पद्मदेव के संदर्भ में कौन सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त है?
(A) उन्हें बलि, वैकर्तन, दधीचि और विक्रमादित्य की तुलना में कम दानशील माना गया
(B) उन्होंने बद्रीनाथ मंदिर को भूमि दान की थी
(C) पद्मदेव सहज बौद्ध भक्त था
(D) पद्मदेव को परम ब्राह्मण कहा गया
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Explanation: पद्मदेव ने बद्रीनाथ मंदिर को भूमि दान दी, जिससे उसकी अतुलनीय दानशीलता और धार्मिक भावना का परिचय मिलता है। उसे सूर्य के समान प्रकाशवान और कर्ण से अधिक दानदाता कहा गया। दानशीलता के संदर्भ में उसकी तुलना बलि, वैकर्तन, दधीचि तथा विक्रमादित्य से की जाती है, अतः विकल्प A गलत है क्योंकि इसका भाव विपरीत है। विकल्प C और D उसके धार्मिक व दानशील योगदान की तुलना में भ्रामक या अपूर्ण हैं।
Q5. पद्मदेव की दानशीलता की तुलना निम्नलिखित में से किन व्यक्तित्वों से की जाती है?
(A) राम, कर्ण, हनुमान, भीम
(B) बलि, वैकर्तन, दधीचि, विक्रमादित्य
(C) अशोक, चंद्रगुप्त, समुद्रगुप्त, पृथ्वीराज
(D) चाणक्य, भर्तृहरि, नागार्जुन, शंकराचार्य
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Explanation: पद्मदेव की दानशीलता की बराबरी बलि, वैकर्तन, दधीचि और विक्रमादित्य के साथ की जाती है, जो प्राचीन और पौराणिक भारतीय इतिहास के लिए दानवीरतापूर्ण व्यक्तित्व हैं। पद्मदेव की अतुलनीय दान नीति वंश की गरिमा थी। अन्य दिए गए विकल्पों का या तो इस प्रसंग से संबंध नहीं है या वे शौर्य एवं बौद्धिकता से जुड़े हैं, दानशीलता से नहीं।
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