उत्तराखंड लोकसेवा आयोग व अधीनस्थ सेवा चयन आयोग द्वारा आयोजित की जानेवाली आगामी परीक्षाओं (UKPSC/ UKSSSC) को मध्यनजर रखते हुए Exam Pillar आपके लिए Daily MCQs प्रोग्राम लेकर आया है। इस प्रोग्राम के माध्यम से अभ्यर्थियों को उत्तराखंड लोकसेवा आयोग व अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के परीक्षाओं के प्रारूप के अनुरूप वस्तुनिष्ठ अध्ययन सामग्री उपलब्ध कराये जायेंगे।
Daily UKPSC / UKSSSC MCQs : उत्तराखंड (Uttarakhand)
14 January, 2026
| Read This UKPSC / UKSSSC Daily MCQ – (Uttarakhand) in English Language |
Q1. पांडुकेश्वर ताम्रपत्र में ललितसूरदेव की किससे तुलना की गई है?
(A) राम से
(B) कृष्ण से
(C) बराहवतार से
(D) नरसिंह अवतार से
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Explanation: पांडुकेश्वर ताम्रपत्र में ललितसूरदेव को कलिकलंकपंक में मग्न धरती के उद्धार के लिए बराहवतार के समान बताया गया है। यह अत्यंत महत्वपूर्ण रूपक है जिसमें ललितसूरदेव की तुलना विष्णु के बराह (वराह) अवतार से की गई है। पौराणिक कथा के अनुसार, जब पृथ्वी जल में डूब गई थी, तब विष्णु ने वराह (सूअर) का रूप धारण कर पृथ्वी को अपने दंतों पर उठाकर उद्धार किया था। इसी प्रकार, ललितसूरदेव ने कलियुग के कलंक और पाप में डूबी धरती का उद्धार किया। यह तुलना उनकी महानता, धार्मिकता और प्रजा के कल्याण के प्रति समर्पण को दर्शाती है। विकल्प A, B और D गलत हैं क्योंकि पांडुकेश्वर ताम्रपत्र में विशेष रूप से बराहवतार की तुलना दी गई है।
Q2. ललितसूरदेव की पत्नियों और उनके धार्मिक योगदान के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सही है?
(A) उसकी एकमात्र पत्नी लया देवी थी
(B) उसकी दो पत्नियां लया देवी व साम देवी थीं, और साम देवी ने भगवान नारायण का मंदिर बनवाया
(C) उसकी पत्नी नाथू देवी ने जागेश्वर मंदिर बनवाया
(D) उसकी पत्नी वेगादेवी ने बैजनाथ मंदिर बनवाया
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Explanation: ललितसूरदेव की दो पत्नियां थीं – लया देवी व साम देवी। साम देवी का विशेष धार्मिक योगदान था क्योंकि उन्होंने भगवान नारायण (विष्णु) का मंदिर बनवाया था। यह उल्लेखनीय है कि यद्यपि कत्यूरी शासक मुख्यतः शैव थे, परंतु साम देवी ने वैष्णव परंपरा के लिए मंदिर निर्माण करवाया, जो धार्मिक सहिष्णुता और समन्वयवादी दृष्टिकोण को दर्शाता है। विकल्प A गलत है क्योंकि ललितसूरदेव की एक नहीं बल्कि दो पत्नियां थीं। विकल्प C गलत है क्योंकि नाथू देवी निम्बर की रानी थी, न कि ललितसूरदेव की। विकल्प D गलत है क्योंकि वेगादेवी इष्टगण देव की पत्नी थी और बैजनाथ मंदिर का निर्माण भूदेव ने करवाया था।
Q3. भूदेव के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों का परीक्षण कीजिए:
I. वह ललितसूरदेव का पुत्र था
II. उसने बैजनाथ मंदिर का निर्माण करवाया
III. वह बौद्ध धर्म का विरोधी था
IV. उसे बागेश्वर शिलालेख में परमबुद्धश्रमण रिपु कहा गया है
सही कथनों की संख्या है:
(A) केवल दो
(B) केवल तीन
(C) सभी चार
(D) केवल एक
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Explanation: सभी चार कथन पूर्णतः सही हैं। कथन I सही है क्योंकि भूदेव ललितसूरदेव का पुत्र था, जो वंश की निरंतरता को दर्शाता है। कथन II सही है क्योंकि प्रसिद्ध बैजनाथ मंदिर का निर्माण भूदेव ने करवाया था, जो कत्यूरी स्थापत्य कला का उत्कृष्ट नमूना है। कथन III सही है क्योंकि भूदेव बौद्ध धर्म का विरोधी था, जो उसकी शैव धर्म के प्रति कट्टर निष्ठा को दर्शाता है। कथन IV सही है क्योंकि बागेश्वर शिलालेख में उसे परमबुद्धश्रमण रिपु कहा गया है। ‘परमबुद्धश्रमण रिपु’ का अर्थ है ‘बौद्ध भिक्षुओं का परम शत्रु’, जो स्पष्ट रूप से उसके बौद्ध विरोधी रुख को प्रमाणित करता है। यह उपाधि भूदेव की धार्मिक नीति और शैव परंपरा की रक्षा के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
Q4. गंगोलीहाट नगर की स्थापना के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सही है?
(A) इसकी स्थापना ललितसूरदेव ने की
(B) इसकी स्थापना भूदेव ने की
(C) इसकी स्थापना राजा सुजानदेव ने विक्रम संवत् 400 के लगभग की
(D) इसकी स्थापना निम्बरदेव ने की
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Explanation: गंगोलीहाट नामक नगर की स्थापना राजा ललितशूरदेव के पुत्र राजा सुजानदेव ने विक्रम संवत् 400 के लगभग (अनुमानित) की थी। यह नगर कुमाऊँ क्षेत्र में धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण स्थान बन गया। गंगोलीहाट शक्तिपीठ के लिए प्रसिद्ध है और कत्यूरी शासकों की नगर नियोजन क्षमता को दर्शाता है। विकल्प A गलत है क्योंकि ललितसूरदेव ने गंगोलीहाट की स्थापना नहीं की, यद्यपि वे सुजानदेव के पिता थे। विकल्प B गलत है क्योंकि भूदेव ने बैजनाथ मंदिर बनवाया था, गंगोलीहाट नगर की स्थापना नहीं की। विकल्प D गलत है क्योंकि निम्बरदेव ने जागेश्वर को धाम के रूप में विकसित किया था, गंगोलीहाट की स्थापना नहीं की। सुजानदेव द्वितीय परिवार की परंपरा को आगे बढ़ाते हुए नगर निर्माण में सक्रिय रहे।
Q5. द्वितीय परिवार के शासकों की वंशावली का सही क्रम क्या है?
(A) निम्बर – ललितसूरदेव – इष्टगण देव – भूदेव
(B) निम्बर – इष्टगण देव – ललितसूरदेव – भूदेव – सुजानदेव
(C) निम्बर – भूदेव – इष्टगण देव – ललितसूरदेव
(D) इष्टगण देव – निम्बर – ललितसूरदेव – सुजानदेव
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Explanation: द्वितीय परिवार की सही वंशावली इस प्रकार है: निम्बर (संस्थापक) – इष्टगण देव (निम्बर का पुत्र) – ललितसूरदेव (इष्टगण का पुत्र, जो लगभग 832 ई० में गद्दी पर बैठा) – भूदेव (ललितसूरदेव का पुत्र) – सुजानदेव (ललितसूरदेव का पुत्र)। यह क्रम स्पष्ट पितृ-पुत्र उत्तराधिकार की परंपरा को दर्शाता है। निम्बर ने द्वितीय परिवार की नींव रखी और वास्तुकला का प्रारंभ किया। इष्टगण देव ने उत्तराखण्ड के एकीकरण का प्रयास किया। ललितसूरदेव सबसे प्रतापी शासक बने। भूदेव ने बैजनाथ मंदिर बनवाया और बौद्ध धर्म का विरोध किया। सुजानदेव ने गंगोलीहाट नगर बसाया। विकल्प A, C और D में क्रम गलत है और ऐतिहासिक उत्तराधिकार के विपरीत है।
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