उत्तराखंड लोकसेवा आयोग व अधीनस्थ सेवा चयन आयोग द्वारा आयोजित की जानेवाली आगामी परीक्षाओं (UKPSC/ UKSSSC) को मध्यनजर रखते हुए Exam Pillar आपके लिए Daily MCQs प्रोग्राम लेकर आया है। इस प्रोग्राम के माध्यम से अभ्यर्थियों को उत्तराखंड लोकसेवा आयोग व अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के परीक्षाओं के प्रारूप के अनुरूप वस्तुनिष्ठ अध्ययन सामग्री उपलब्ध कराये जायेंगे।
Daily UKPSC / UKSSSC MCQs : उत्तराखंड (Uttarakhand)
12 January, 2026
| Read This UKPSC / UKSSSC Daily MCQ – (Uttarakhand) in English Language |
Q1. कल्याण राज के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन सा तथ्य सही है?
(A) उसकी पत्नी का नाम कल्याण देवी था
(B) उसकी पत्नी का नाम लद्धादेवी था
(C) वह बसन्तदेव वंश का अंतिम शासक था
(D) उसने व्याघ्रेश्वर मंदिर के लिए भूमि दान की थी
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Explanation: कल्याण राज खर्परदेव का पुत्र था और उसकी पत्नी का नाम महारानी लद्धादेवी था। विकल्प A गलत है क्योंकि कल्याण देवी खर्परदेव की पत्नी थी, न कि कल्याण राज की। यह नामों की समानता के कारण भ्रामक हो सकता है, परंतु दोनों अलग-अलग व्यक्तित्व हैं। विकल्प C गलत है क्योंकि बसन्तदेव वंश का अंतिम शासक त्रिभुवनराज था, न कि कल्याण राज। बागेश्वर लेख में स्पष्ट रूप से त्रिभुवनराज को अंतिम शासक बताया गया है। विकल्प D भी गलत है क्योंकि व्याघ्रेश्वर मंदिर के लिए भूमि दान त्रिभुवनराज ने की थी। महारानी लद्धादेवी का उल्लेख कल्याण राज की राजनीतिक और पारिवारिक स्थिति को स्थापित करता है।
Q2. त्रिभुवनराज द्वारा धारण की गई उपाधि और बसन्तदेव की उपाधि में क्या समानता थी?
(A) दोनों ने गिरिराज चक्रचूड़ामणि की उपाधि धारण की
(B) दोनों ने परमभट्टारक महाराजाधिराज परमेश्वर की उपाधि धारण की
(C) दोनों ने केवल महाराजाधिराज की उपाधि धारण की
(D) दोनों ने भिन्न-भिन्न उपाधियाँ धारण कीं
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Explanation: बसन्तदेव और त्रिभुवनराज दोनों ने परमभट्टारक महाराजाधिराज परमेश्वर की उपाधि धारण की थी। यह समानता दर्शाती है कि बसन्तदेव वंश के संस्थापक और अंतिम शासक दोनों ने समान सर्वोच्च उपाधियाँ धारण कीं, जो वंश की निरंतर प्रतिष्ठा और राजनीतिक सत्ता को प्रदर्शित करती है। विकल्प A गलत है क्योंकि गिरिराज चक्रचूड़ामणि उपाधि कार्तिकेयपुर राजाओं की सामान्य उपाधि थी, परंतु यहाँ विशेष रूप से बसन्तदेव और त्रिभुवनराज द्वारा धारण की गई समान उपाधि की बात हो रही है। विकल्प C अपूर्ण है क्योंकि दोनों ने केवल महाराजाधिराज नहीं बल्कि परमभट्टारक महाराजाधिराज परमेश्वर की संयुक्त उपाधि धारण की। विकल्प D गलत है क्योंकि दोनों की उपाधियाँ समान थीं।
Q3. त्रिभुवनराज के शासनकाल की विशेषताओं के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
I. उसने व्याघ्रेश्वर मंदिर के लिए भूमि दान की
II. उसने किरातों से संधि की
III. उसने शौकाओं से भी संधि की
IV. वह बसन्तदेव वंश का अंतिम शासक था
उपर्युक्त में से कितने कथन सही हैं?
(A) केवल दो
(B) केवल तीन
(C) सभी चार
(D) केवल एक
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Explanation: सभी चार कथन पूर्णतः सही हैं। कथन I सही है क्योंकि त्रिभुवनराज ने व्याघ्रेश्वर मंदिर के लिए भूमि दान की, जो उनकी धार्मिक दानशीलता को दर्शाता है। कथन II सही है क्योंकि त्रिभुवनराज ने किरातों से संधि की थी। किरात हिमालयी क्षेत्र की एक प्राचीन जनजाति थी। कथन III सही है क्योंकि त्रिभुवनराज ने शौकाओं से भी संधि की। ये संधियाँ उनकी कूटनीतिक दूरदर्शिता और पड़ोसी जनजातियों के साथ शांतिपूर्ण संबंध स्थापित करने की नीति को प्रदर्शित करती हैं। कथन IV सही है क्योंकि बागेश्वर लेख के अनुसार त्रिभुवनराज बसन्तदेव वंश का अंतिम शासक था। उसके बाद द्वितीय परिवार निम्बरदेव राजवंश का शासन आरंभ हुआ। ये सभी तथ्य त्रिभुवनराज के बहुआयामी व्यक्तित्व को उजागर करते हैं।
Q4. कश्मीरी इतिहासकार कल्हण की राजतरंगिणी में किस घटना का उल्लेख मिलता है जो कार्तिकेयपुर वंश से संबंधित है?
(A) बसन्तदेव द्वारा कश्मीर पर आक्रमण
(B) कश्मीरी राजा ललितादित्या मुक्तापीड़ द्वारा गढ़वाल क्षेत्र को जीतना
(C) खर्परदेव द्वारा कश्मीर के साथ संधि
(D) त्रिभुवनराज द्वारा कश्मीर से व्यापारिक संबंध
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Explanation: कश्मीरी इतिहासकार कल्हण की प्रसिद्ध पुस्तक राजतरंगिणी में कश्मीरी राजा ललितादित्या मुक्तापीड़ द्वारा गढ़वाल क्षेत्र को जीतने का उल्लेख मिलता है। ललितादित्या मुक्तापीड़ 8वीं शताब्दी के प्रारंभ में एक शक्तिशाली कश्मीरी शासक था जिसने व्यापक विजय अभियान चलाए। यह उल्लेख कार्तिकेयपुर वंश और उत्तर भारत की अन्य शक्तियों के बीच राजनीतिक संघर्ष को दर्शाता है। विकल्प A गलत है क्योंकि बसन्तदेव द्वारा कश्मीर पर आक्रमण का कोई उल्लेख नहीं है। विकल्प C गलत है क्योंकि खर्परदेव और कश्मीर के बीच संधि का उल्लेख नहीं मिलता। विकल्प D भी गलत है क्योंकि त्रिभुवनराज के व्यापारिक संबंधों का उल्लेख राजतरंगिणी में नहीं है। राजतरंगिणी 12वीं शताब्दी में लिखा गया कश्मीर का महत्वपूर्ण ऐतिहासिक ग्रंथ है।
Q5. बसन्तदेव वंश के शासकों की वंशावली का सही क्रम क्या है?
(A) बसन्तदेव – कल्याण राज – खर्परदेव – त्रिभुवनराज
(B) बसन्तदेव – खर्परदेव – त्रिभुवनराज – कल्याण राज
(C) बसन्तदेव – खर्परदेव – कल्याण राज – त्रिभुवनराज
(D) बसन्तदेव – त्रिभुवनराज – खर्परदेव – कल्याण राज
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Explanation: बसन्तदेव वंश के शासकों की सही वंशावली इस प्रकार है: बसन्तदेव (संस्थापक) – खर्परदेव (बसन्तदेव का उत्तराधिकारी) – कल्याण राज (खर्परदेव का पुत्र) – त्रिभुवनराज (वंश का अंतिम शासक)। यह क्रम स्पष्ट पितृ-पुत्र उत्तराधिकार की परंपरा को दर्शाता है। बसन्तदेव ने वंश की स्थापना की और प्रथम परिवार की नींव रखी। खर्परदेव ने शासन को आगे बढ़ाया और कन्नौज के यशोवर्मन के समकालीन रहे। कल्याण राज ने पारिवारिक परंपरा को निरंतर रखा और महारानी लद्धादेवी से विवाह किया। अंत में त्रिभुवनराज ने वंश का नेतृत्व किया, किरातों और शौकाओं से संधि की, और व्याघ्रेश्वर मंदिर को भूमि दान दी। विकल्प A, B और D में क्रम गलत है और ऐतिहासिक उत्तराधिकार के विपरीत है। यह वंशावली कार्तिकेयपुर राजवंश के प्रथम परिवार की राजनीतिक निरंतरता और स्थिरता को प्रदर्शित करती है।
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