उत्तराखंड लोकसेवा आयोग व अधीनस्थ सेवा चयन आयोग द्वारा आयोजित की जानेवाली आगामी परीक्षाओं (UKPSC/ UKSSSC) को मध्यनजर रखते हुए Exam Pillar आपके लिए Daily MCQs प्रोग्राम लेकर आया है। इस प्रोग्राम के माध्यम से अभ्यर्थियों को उत्तराखंड लोकसेवा आयोग व अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के परीक्षाओं के प्रारूप के अनुरूप वस्तुनिष्ठ अध्ययन सामग्री उपलब्ध कराये जायेंगे।
Daily UKPSC / UKSSSC MCQs : उत्तराखंड (Uttarakhand)
10 January, 2026
| Read This UKPSC / UKSSSC Daily MCQ – (Uttarakhand) in English Language |
Q1. कत्यूरी राजवंश के ऐतिहासिक महत्व का मूल्यांकन करते हुए निम्नलिखित में से कौन सा कथन सर्वाधिक समुचित है?
(A) यह केवल धार्मिक महत्व का वंश था जिसका राजनीतिक प्रभाव सीमित था
(B) यह मध्य हिमालय का प्रथम ऐतिहासिक राजवंश था जिसने संगठित शासन, अभिलेखीय परंपरा और व्यापक भौगोलिक नियंत्रण स्थापित किया
(C) यह एक अल्पकालिक वंश था जिसके बारे में पर्याप्त जानकारी उपलब्ध नहीं है
(D) यह केवल स्थानीय महत्व का वंश था जिसका कोई ऐतिहासिक प्रमाण नहीं मिलता
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Explanation: विकल्प B सर्वाधिक उपयुक्त है क्योंकि यह कार्तिकेयपुर राजवंश के बहुआयामी महत्व को समग्रता से प्रस्तुत करता है। इसे मध्य हिमालय का प्रथम ऐतिहासिक राजवंश माना जाता है जिसने लगभग 300 वर्षों तक स्थिर और संगठित शासन चलाया। 9 अभिलेखों की प्राप्ति अभिलेखीय परंपरा को दर्शाती है। बागेश्वर, पांडुकेश्वर, कंडारा, बैजनाथ और चंपावत से प्राप्त अभिलेख व्यापक भौगोलिक नियंत्रण के साक्ष्य हैं। बहुकेंद्रीय राजधानी व्यवस्था प्रशासनिक परिपक्वता दर्शाती है। विकल्प A गलत है क्योंकि यह राजनीतिक प्रभाव को नकारता है। विकल्प C गलत है क्योंकि 300 वर्ष का शासन अल्पकालिक नहीं है और पर्याप्त साक्ष्य उपलब्ध हैं। विकल्प D पूर्णतः गलत है क्योंकि 9 अभिलेख और विभिन्न विद्वानों का शोध ऐतिहासिक प्रमाण प्रदान करते हैं।
Q2. कार्तिकेयपुर वंश के प्रथम परिवार के संस्थापक बसन्तदेव द्वारा धारण की गई उपाधि के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
I. उन्होंने परमभट्टारक की उपाधि धारण की
II. उन्होंने महाराजाधिराज की उपाधि धारण की
III. उन्होंने परमेश्वर की उपाधि धारण की
IV. उन्होंने गिरिराज चक्रचूड़ामणि की उपाधि धारण की
उपर्युक्त में से कौन से कथन सही हैं?
(A) केवल I और II
(B) केवल I, II और III
(C) केवल II, III और IV
(D) I, II, III और IV सभी
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Explanation: बसन्तदेव ने परमभट्टारक महाराजाधिराज परमेश्वर की उपाधि धारण की थी, जो उनकी सर्वोच्च राजनीतिक और धार्मिक स्थिति को दर्शाती है। कथन I, II और III सभी सही हैं क्योंकि ये तीनों उपाधियाँ बसन्तदेव द्वारा धारण की गई थीं। परमभट्टारक का अर्थ सर्वोच्च प्रभु, महाराजाधिराज का अर्थ राजाओं का राजा, और परमेश्वर का अर्थ सर्वोच्च ईश्वरीय शक्ति से संपन्न शासक है। कथन IV गलत है क्योंकि गिरिराज चक्रचूड़ामणि उपाधि जोशीमठ के वासुदेव मंदिर में उत्कीर्ण कत्यूरी सम्राट श्रीवासुदेव से संबंधित थी, न कि विशेष रूप से बसन्तदेव से। यह उपाधि कार्तिकेयपुर राजाओं की सामान्य उपाधि प्रतीत होती है, जो पर्वतीय क्षेत्र में उनकी सर्वोच्चता को दर्शाती है। अतः केवल पहले तीन कथन बसन्तदेव की विशिष्ट उपाधियों से संबंधित हैं।
Q3. बसन्तदेव के धार्मिक और सांस्कृतिक योगदान के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सही नहीं है?
(A) उन्होंने एक मंदिर को स्वर्णेश्वर नामक ग्राम दान दिया
(B) उन्होंने जोशीमठ में नृसिंह मंदिर का निर्माण करवाया
(C) उन्होंने व्याघ्रेश्वर मंदिर के लिए भूमि दान की
(D) बागेश्वर लेख में उनके दान का उल्लेख मिलता है
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Explanation: विकल्प C गलत है क्योंकि व्याघ्रेश्वर मंदिर के लिए भूमि दान त्रिभुवनराज ने की थी, न कि बसन्तदेव ने। त्रिभुवनराज बसन्तदेव वंश का अंतिम शासक था। विकल्प A सही है क्योंकि बागेश्वर लेख के अनुसार बसन्तदेव ने एक मंदिर को स्वर्णेश्वर नामक ग्राम दान दिया था, जो उनकी धार्मिक दानशीलता को प्रदर्शित करता है। विकल्प B सही है क्योंकि जोशीमठ में नृसिंह मंदिर का निर्माण बसन्तदेव ने करवाया था, जो वैष्णव परंपरा के प्रति उनकी आस्था का प्रतीक है। विकल्प D सही है क्योंकि बागेश्वर लेख में वास्तव में बसन्तदेव के दान का स्पष्ट उल्लेख है। यह प्रश्न वंश के विभिन्न शासकों के योगदानों को सही रूप से पहचानने की क्षमता का परीक्षण करता है।
Q4. जोशीमठ के वासुदेव मंदिर में उत्कीर्ण अभिलेख से क्या महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त होती है?
(A) बसन्तदेव की विजय यात्राओं का विवरण
(B) कत्यूरी राजाओं की गिरिराज चक्रचूड़ामणि उपाधि का प्रमाण
(C) खर्परदेव की वंशावली
(D) त्रिभुवनराज की संधियों का विवरण
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Explanation: जोशीमठ में स्थित प्राचीन वासुदेव मंदिर में कत्यूरी सम्राट का नाम श्रीवासुदेव गिरिराज चक्रचूड़ामणि उत्कीर्ण है। इस अभिलेख से यह स्पष्ट होता है कि कार्तिकेयपुर राजाओं की गिरिराज चक्रचूड़ामणि उपाधि थी, जो पर्वतीय राजाओं के शिखर पर विराजमान होने का प्रतीक है। गिरिराज का अर्थ पर्वतों के राजा और चक्रचूड़ामणि का अर्थ चक्रवर्ती सम्राट या सर्वोच्च मुकुटधारी से है। यह उपाधि हिमालयी क्षेत्र में उनकी सर्वोच्च राजनीतिक स्थिति को दर्शाती है। विकल्प A गलत है क्योंकि इस अभिलेख में विजय यात्राओं का विवरण नहीं है। विकल्प C गलत है क्योंकि यह खर्परदेव की वंशावली से संबंधित नहीं है। विकल्प D भी गलत है क्योंकि त्रिभुवनराज की संधियों का उल्लेख बागेश्वर लेख में मिलता है, वासुदेव मंदिर के अभिलेख में नहीं।
Q5. खर्परदेव के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों का परीक्षण कीजिए:
I. वह बसन्तदेव का उत्तराधिकारी था
II. उसकी पत्नी का नाम कल्याण देवी था
III. वह कन्नौज के राजा यशोवर्मन का समकालीन था
IV. उसका पुत्र त्रिभुवनराज था
सही कथनों का चयन कीजिए:
(A) केवल I, II और III
(B) केवल II, III और IV
(C) केवल I, II और IV
(D) I, II, III और IV सभी
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Explanation: कथन I सही है क्योंकि बसन्तदेव के बाद खर्परदेव शासक बना, जो उत्तराधिकार की स्पष्ट श्रृंखला दर्शाता है। कथन II सही है क्योंकि खर्परदेव की पत्नी का नाम कल्याण देवी था। कथन III सही है क्योंकि खर्परदेव कन्नौज के प्रतापी राजा यशोवर्मन के समकालीन था, जो 8वीं शताब्दी के प्रारंभ में शासन करते थे। यह समकालीनता कार्तिकेयपुर वंश को कालक्रम में स्थापित करने में सहायक है। कथन IV गलत है क्योंकि खर्परदेव का पुत्र कल्याण राज था, न कि त्रिभुवनराज। त्रिभुवनराज बसन्तदेव वंश का अंतिम शासक था, परंतु वह खर्परदेव का प्रत्यक्ष पुत्र नहीं था। वंशक्रम इस प्रकार है: बसन्तदेव – खर्परदेव – कल्याण राज – त्रिभुवनराज।
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