Daily Indian Express Editorial - Amid Kanwar Yatra, the challenge for the secular liberal

कांवड़ यात्रा की चुनौती और धर्मनिरपेक्ष-उदारवादी मूल्य

भारतीय समाज में विभिन्न धार्मिक उत्सव और अनुष्ठान न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक होते हैं, बल्कि ये समाज के विविधतापूर्ण ताने-बाने को भी दर्शाते हैं। Indian Express के लेख “Amid Kanwar Yatra, the challenge for the secular liberal” में कांवड़ यात्रा की वर्तमान स्थिति और धर्मनिरपेक्ष-उदारवादी मूल्यों के बीच टकराव पर चर्चा की गई है। यह लेख कांवड़ यात्रा के सामाजिक और सांस्कृतिक प्रभावों की समीक्षा करता है और यह समझने की कोशिश करता है कि यह कैसे धर्मनिरपेक्षता और उदारवादी मूल्यों के साथ टकरा रही है।

कांवड़ यात्रा के बीच, धर्मनिरपेक्ष उदारवादियों के लिए चुनौती
(Amid Kanwar Yatra, the challenge for the secular liberal)

कांवड़ यात्रा, जो हर साल सावन महीने के दौरान लाखों शिवभक्तों द्वारा की जाती है, अब एक विवाद का केंद्र बन गई है। यह यात्रा उत्तर भारत के विभिन्न हिस्सों से हरिद्वार और अन्य तीर्थ स्थलों की ओर की जाती है, जहां भक्त गंगाजल एकत्रित करके अपने घरों में लौटते हैं। इस यात्रा के दौरान अक्सर सड़कें जाम होती हैं और कई बार स्थानीय प्रशासन को सुरक्षा और ट्रैफिक प्रबंधन में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।

मुजफ्फरनगर 

मुजफ्फरनगर, पश्चिमी उत्तर प्रदेश का एक प्रमुख शहर, 1633 में मुगल बादशाह शाहजहां के सेवक सैयद मुजफ्फर खान द्वारा स्थापित किया गया था। गंगा और यमुना नदियों द्वारा समृद्ध दोआब क्षेत्र में स्थित, यह शहर तेज़ी से सांप्रदायिक तनाव के केंद्र के रूप में उभर रहा है। राज्य सरकार की विभाजनकारी नीतियां यहां के वार्षिक कांवड़ यात्रा के दौरान सांप्रदायिक तनाव को और बढ़ा देती हैं।

मुजफ्फरनगर का इतिहास और सांस्कृतिक धरोहर

मुजफ्फरनगर का इतिहास बेहद रोचक और विविधतापूर्ण रहा है। यहां ज़र, जोरू और ज़मीन (सोना, महिलाएं और ज़मीन) के लिए कई बार खून बहाया गया है। यह शहर सांप्रदायिक हिंसा का भी गवाह रहा है। इसके बावजूद, यह शहर कई महान लेखकों और कलाकारों का घर भी रहा है, जैसे कि आलम मुजफ्फरनगरी, विष्णु प्रभाकर, विशाल भारद्वाज और नवाजुद्दीन सिद्दीकी। पाकिस्तान के पहले प्रधानमंत्री लियाकत अली खान और किसान नेता राकेश टिकैत का भी यहाँ निवास रहा है। इसके अलावा, यहां के विद्रोही-से-डॉन बने इंद्रपाल जाट और रमेश कालिया के नाम भी प्रसिद्ध हैं।

कृषि और उद्योगों में योगदान

पश्चिमी उत्तर प्रदेश की जनसंख्या में जाट किसान, पशुपालन में लगे गुज्जर और मुस्लिम शामिल हैं। इस क्षेत्र के विशाल बागों में मुख्यतः मुस्लिमों द्वारा लगाए गए आम, लीची और अमरूद के पेड़ होते हैं। समुदाय ने कई फैक्ट्रियां भी स्थापित की हैं, जो फर्नीचर और संगीत वाद्ययंत्र जैसे विभिन्न वस्त्रों का उत्पादन करती हैं। यहां की चीनी उद्योग, इस्पात और कागज मिलें भी प्रमुख आर्थिक हिस्से हैं। मुजफ्फरनगर दिल्ली, हरिद्वार और देहरादून के राष्ट्रीय राजमार्गों के साथ-साथ दिल्ली, मुंबई और अमृतसर को जोड़ने वाले मार्गों पर स्थित है।

हालिया विवाद और राजनीतिक प्रतिक्रियाएँ

पिछले हफ्ते, क्षेत्र के डिप्टी इंस्पेक्टर जनरल (DIG) ने आदेश दिया कि दिल्ली-हरिद्वार मार्ग पर स्थित सभी खाने-पीने की दुकानों और विक्रेताओं को अपने मालिक का नाम (जो उनके जाति और धर्म का संकेतक है) और मोबाइल नंबर प्रदर्शित करना अनिवार्य है। हालांकि, बाद में इस आदेश को स्वैच्छिक बना दिया गया। हिंदी समाचार पत्रों में रिपोर्ट के अनुसार, मुजफ्फरनगर के बघारा आश्रम के यशवीर महाराज ने दावा किया कि यहां के मुस्लिम अपनी दुकानों के बाहर हिंदू देवी-देवताओं के फोटो चिपका रहे हैं और इन दुकानों को भ्रामक नाम दे रहे हैं ताकि ग्राहकों को आकर्षित किया जा सके। उन्होंने कहा कि कांवड़ियों को यह जानने का अधिकार है कि वे जो खा रहे हैं वह शुद्ध हिंदू शाकाहारी भोजन है, जो मांसाहारी के स्पर्श और बर्तनों से मुक्त है।

इस खबर ने तुरंत ही हंगामा खड़ा कर दिया। आश्चर्यजनक रूप से, नकारात्मक प्रतिक्रिया देने वालों में भाजपा के एक अल्पसंख्यक नेता भी शामिल थे। उन्होंने कहा कि राज्य के अति उत्साही अधिकारियों का यह भेदभावपूर्ण आदेश अस्पृश्यता को मजबूत करेगा। असदुद्दीन ओवैसी ने विरोध जताते हुए कहा कि यह आदेश मुस्लिमों को और अलग-थलग कर देगा। लेकिन इस समय तक असंतुष्टों की आवाज़ें शोर में दब गईं। मुख्यमंत्री कार्यालय ने दोहराया कि रास्ते में कोई हलाल उत्पाद नहीं बेचा जा सकता है और मुस्लिम मालिकों को अपने भोजनालयों को हिंदू-साउंडिंग नाम देकर अपनी पहचान छिपानी नहीं चाहिए। समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव ने एक महत्वपूर्ण सवाल उठाया: कौन बता सकता है कि एक फल विक्रेता का धर्म या जाति क्या है?

निष्कर्ष

मुजफ्फरनगर का इतिहास और वर्तमान दोनों ही संघर्षों और विवादों से भरा है, लेकिन यह शहर अपनी सांस्कृतिक धरोहर और आर्थिक योगदान के लिए भी जाना जाता है। यहां की विविधता और सांप्रदायिक समरसता को बनाए रखना महत्वपूर्ण है ताकि यह शहर अपने गौरवशाली इतिहास और समृद्ध भविष्य को संरक्षित कर सके।

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